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मौलाना अरशद मदनी ने कहा मुसलमानों को वंदे मातरम् पढ़ने या गाने पर आपत्ति इसलिए होती है

मौलाना अरशद मदनी ने कहा

मुसलमानों को वंदे मातरम् पढ़ने या गाने पर आपत्ति इसलिए होती है
क्योंकि इसके कुछ श्लोकों में देश को देवी-देवता के रूप में प्रस्तुत किया गया है और पूजा के शब्दों का प्रयोग हुआ है, जो इस्लाम की ईमान की बुनियाद—एक अल्लाह की इबादत—के ख़िलाफ़ माना जाता है
इसलिए किसी भी मुसलमान को उसकी धार्मिक आस्था के विरुद्ध कोई नारा या गीत गाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता
संविधान भी नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता और अपनी अभिव्यक्ति का अधिकार देता है
वतन से मोहब्बत और उसकी पूजा—दो अलग बातें हैं
मुसलमानों की देशभक्ति पर किसी प्रमाण की आवश्यकता नहीं
उनका स्वतंत्रता संग्राम में योगदान इतिहास में दर्ज है
मुसलमान अल्लाह के सिवा किसी को पूजनीय नहीं मानते और शिर्क को किसी भी हाल में स्वीकार नहीं करते

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