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3 माह से वेतन नहीं, फिर भी ड्यूटी जारी! चित्रकूट स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर उठे बड़े सवाल चित्रकूट जनपद चित्रकूट के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) में कार्यरत संविदा कर्मचारियों को पिछले तीन माह से वेतन न मिलने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। लगातार वेतन भुगतान में हो रही देरी से कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट गहराता जा रहा है, वहीं स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों के अनुसार जिले के विभिन्न सीएचसी में तैनात संविदा कर्मचारी नियमित रूप से अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें पिछले तीन महीनों से वेतन नहीं मिला है। कर्मचारियों का कहना है कि परिवार का भरण-पोषण, बच्चों की पढ़ाई, मकान किराया और दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति करना मुश्किल हो गया है। वेतन रुका, बढ़ी परेशानी संविदा कर्मचारियों का आरोप है कि कई बार संबंधित अधिकारियों को समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। आर्थिक तंगी के चलते कर्मचारियों को कर्ज लेने तक की नौबत आ गई है। स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है असर विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कर्मचारियों की समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया गया तो इसका सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है। अस्पतालों की व्यवस्था में संविदा कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है और उनका मनोबल गिरना स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए चिंता का विषय बन सकता है।

3 माह से वेतन नहीं, फिर भी ड्यूटी जारी! चित्रकूट स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर उठे बड़े सवाल

चित्रकूट
जनपद चित्रकूट के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) में कार्यरत संविदा कर्मचारियों को पिछले तीन माह से वेतन न मिलने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। लगातार वेतन भुगतान में हो रही देरी से कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट गहराता जा रहा है, वहीं स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार जिले के विभिन्न सीएचसी में तैनात संविदा कर्मचारी नियमित रूप से अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें पिछले तीन महीनों से वेतन नहीं मिला है। कर्मचारियों का कहना है कि परिवार का भरण-पोषण, बच्चों की पढ़ाई, मकान किराया और दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति करना मुश्किल हो गया है।

वेतन रुका, बढ़ी परेशानी

संविदा कर्मचारियों का आरोप है कि कई बार संबंधित अधिकारियों को समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। आर्थिक तंगी के चलते कर्मचारियों को कर्ज लेने तक की नौबत आ गई है।

स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है असर

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कर्मचारियों की समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया गया तो इसका सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है। अस्पतालों की व्यवस्था में संविदा कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है और उनका मनोबल गिरना स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए चिंता का विषय बन सकता है।

विभागीय जिम्मेदारों की चुप्पी पर सवाल

तीन माह से वेतन भुगतान न होने के बावजूद विभागीय जिम्मेदारों की ओर से कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है। इससे कर्मचारियों में रोष बढ़ता जा रहा है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब कर्मचारी पूरी निष्ठा के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, तो उनके मेहनताने का भुगतान समय पर क्यों नहीं किया जा रहा?

कर्मचारियों ने की शीघ्र भुगतान की मांग

संविदा कर्मचारियों ने शासन और उच्च अधिकारियों से हस्तक्षेप कर लंबित वेतन का तत्काल भुगतान कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे आगे की रणनीति बनाने को मजबूर होंगे।

बड़ा सवाल

क्या स्वास्थ्य विभाग संविदा कर्मचारियों के भरोसे चल रहा है या उनकी समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है? तीन माह से वेतन न मिलना प्रशासनिक लापरवाही है या वित्तीय अव्यवस

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