सर्पदंश के दृष्टिगत दिशा-निर्देश जारी
कानपुर देहात
जिलाधिकारी आलोक सिंह के निर्देश के क्रम में अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व दुष्यंत कुमार मौर्य ने बताया कि वर्षा के मौसम में अक्सर वर्षा के कारण सर्प अपने बिलों से बाहर निकलकर सुरक्षित स्थान दूढ़ने तथा भोजन की तलाश मे स्थानीय घरों तक पहुंच जाते हैं। वर्षा काल में सर्पदंश की घटनायें ज्यादा घटित होते हैं यदि समस्त जनमानस वर्षा के दिनों में सावधानी बरते तो सर्पदंश की घटनाओं तथा इससे होने वाली क्षति को न्यून किया जा सकता है। सर्पदंश के दृष्टिगत निम्नलिखित दिशा-निर्देश जारी किये जाते है-
क्या करें, क्या न करें।
क्या करें।
•सर्पदंश होने पर कदापि न घबरायें।
•पीड़ित का होसला बढ़ायें।
•सर्पदंश वाले स्थान को साफ पानी से धोएं।
•सर्पदंश वाले स्थान से ऊपर दुर्निकिट (पट्टी) ऐसे बांधे की पीडित का रक्त प्रवाह न रूके ।
•पीड़ित के शरीर से कसा वस्तु (घडी, चैन, अंगूठियाँ, बेल्ट, जूता) पहन रखी हो तो निकाल दें।
•पीडित को यथासंभव स्थिर रखने का प्रयास करें।
•पीडित को तत्काल निकटतम स्वास्थ्य केन्द्र ले जाकर स्नैक एटींवेनग इन्जेक्शन लगवायें।
क्या न करें।
•सर्पदंश की घटना घटित होने पर झाड़-फूक/तांत्रिक के पास न जायें।
•सर्पदंश वाले स्थान पर ब्लेड या धारदार वस्तु से चीरा न लगायें।
•सर्पदंश वाले स्थान से मुंह लगाकर जहर निकालने की कोशिश न करें।
•पीडित को सोने न दें।
•सर्पदंश वाले स्थान पर रस्सी न बांधे।
•पीडित के धाव से किसी प्रकार की छेड़-छाड न करें।
▪︎लक्षण ।▪︎
•सर्पदंश वाले स्थान पर जलन के साथ-साथ तेज दर्द होना।
•काटे गये स्थान पर सूजन होना।
•पीड़ित को बचौनी होना।
•सॉस लेने में परेशानी।
•पलकों का भारी होना।
•नोट-उक्त के अतिरिक्त आकाशीय विद्युत से सुरक्षा व बचाव हेतु दामिनी ऐप व अन्य आपदा से सुरक्षा व बचाव हेतु सचेत ऐप डाउनलोड करें।
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