बिधूना क्षेत्र में अधिकांश गौशालाओं में अव्यवस्थाओं से जूझ रहे गौवंश
गंदगी में रहकर भूख प्यास से तड़प रहे गोवंश जिम्मेदार बनें लापरवाह
,औरैया। बिधूना क्षेत्र की अधिकांश गौशालाएं संबंधित कर्मचारियों की खाऊ कमाऊ नीति व लापरवाही के चलते अव्यवस्थाओं के मकड़जाल में फंसी हुई नजर आ रही है। हालत यह है कि इन ज्यादातर गौशालाओं में आश्रय पा रहे गोवंश पर्याप्त चारे पानी के अभाव में परेशान होने के साथ ही कीचड़ व गंदगी के बीच रहने को मजबूर हैं। इन दिनों बिधूना तहसील क्षेत्र की अधिकांश गौशालाएं बुरी तरह अव्यवस्थाओं के मकड़जाल में फंसी नजर आ रही है। संबंधित कर्मचारियों की खाऊ कमाऊ नीति एवं लापरवाही के चलते इन ज्यादातर गौशालाओं में आश्रय पा रहे गौवंश भूख प्यास बीमारी से परेशान होने के साथ ही कीचड़ गंदगी में रहकर भारी मुसीबतें उठाने को मजबूर दिख रहे हैं। तमाम गौशालाओं में कीचड़ सर्दी की शुरुआत में ही आश्रम पा रहे गोवंशों पर भारी पड़ता नजर आ रहा है। .इतना ही नहीं कहने को तो बीमार गोवंशों के उपचार के लिए गौशाला से संबंधित पशु चिकित्सालयों के पशु चिकित्सा कर्मियों को उपचार की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है, लेकिन यह चिकित्सा कर्मी बीमार गोवंशों का कई कई दिन तक उपचार करने की जहमत नजर नहीं आते है जिससे कमजोर बीमार गोवंशों की अक्सर मौतें भी हो जाती है। सबसे दिलचस्प और गौरतलब बात तो यह है कि गौशालाओं में आश्रय पा रहे गोवंशों की जिस तरह से दुर्दशा दिख रही है उससे यदि गौशाला में व्याप्त अव्यवस्था की यही दशा रही तो और गोवंशों के बीमार कमजोर होकर तड़प तड़प कर मरने की बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। गौशालाओं में जब भूख प्यास बीमारी से गोवंशों की मौतें होती है तो अधिकारी जांच पड़ताल संबंधितों पर कार्यवाही करने के बड़े-बड़े दावे करते हैं, लेकिन बाद में यह मामले ठंडे बस्ते में डाल दिए जाते हैं। गौरतलब बात तो यह भी है कि आवारा गोवंशों को आश्रय देने के लिए नाम पर भी जिम्मेदार अपने आर्थिक फायदे में लगे नजर आ रहे हैं जिससे क्षेत्रीय बुद्धिजीवी बेहद चिंतित है। गौशालाओं से संबंधित अधिकारी आरोपी को गलत बता रहे हैं।
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