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चोकर की रोटी, बेल्ट की मार और मौत का खौफ’ छह महीने बाद घर लौटा शिवम औरैया। मुजफ्फरनगर की दोना-पत्तल फैक्ट्री से मुक्त कराए गए 13 बंधक मजदूरों में शामिल दिबियापुर थाना क्षेत्र के ग्राम खजुबैया निवासी शिवम शनिवार रात अपने घर पहुंच गया। छह महीने बाद बेटे के घर लौटने पर परिवार की आंखें नम हो गईं। घर पहुंचने के बाद शिवम ने फैक्ट्री में झेली गई अमानवीय यातनाओं की दर्दनाक दास्तां सुनाई, जिसे सुनकर परिजनों सहित आसपास के लोग भी भावुक हो उठे। शिवम ने बताया कि वह गुरुग्राम में सिलाई का काम करता था। एक जनवरी को घर लौटते समय रेलवे स्टेशन पर उसका पर्स और सामान चोरी हो गया। बिना टिकट दिल्ली पहुंचने पर मुजफ्फरनगर के एक युवक अंकित ने उसे काम दिलाने का झांसा दिया। भरोसा कर उसके साथ जाने के बाद उसे एक दोना-पत्तल फैक्ट्री में बंधक बना लिया गया, जहां जबरन मजदूरी कराई जाने लगी। पीड़ित के अनुसार फैक्ट्री में मजदूरों से दिन-रात काम कराया जाता था और मुश्किल से एक से डेढ़ घंटे ही सोने दिया जाता था। विरोध करने पर बेल्ट, मशीनों के तार और पेचकस से बेरहमी से पीटा जाता

चोकर की रोटी, बेल्ट की मार और मौत का खौफ’ छह महीने बाद घर लौटा शिवम

औरैया। मुजफ्फरनगर की दोना-पत्तल फैक्ट्री से मुक्त कराए गए 13 बंधक मजदूरों में शामिल दिबियापुर थाना क्षेत्र के ग्राम खजुबैया निवासी शिवम शनिवार रात अपने घर पहुंच गया। छह महीने बाद बेटे के घर लौटने पर परिवार की आंखें नम हो गईं। घर पहुंचने के बाद शिवम ने फैक्ट्री में झेली गई अमानवीय यातनाओं की दर्दनाक दास्तां सुनाई, जिसे सुनकर परिजनों सहित आसपास के लोग भी भावुक हो उठे।
शिवम ने बताया कि वह गुरुग्राम में सिलाई का काम करता था। एक जनवरी को घर लौटते समय रेलवे स्टेशन पर उसका पर्स और सामान चोरी हो गया। बिना टिकट दिल्ली पहुंचने पर मुजफ्फरनगर के एक युवक अंकित ने उसे काम दिलाने का झांसा दिया। भरोसा कर उसके साथ जाने के बाद उसे एक दोना-पत्तल फैक्ट्री में बंधक बना लिया गया, जहां जबरन मजदूरी कराई जाने लगी। पीड़ित के अनुसार फैक्ट्री में मजदूरों से दिन-रात काम कराया जाता था और मुश्किल से एक से डेढ़ घंटे ही सोने दिया जाता था। विरोध करने पर बेल्ट, मशीनों के तार और पेचकस से बेरहमी से पीटा जाता था। खाने के नाम पर पूरे दिन में केवल चोकर की चार रोटियां, नमक और लाल मिर्च दी जाती थी। छह महीने तक सब्जी तक नसीब नहीं हुई। फैक्ट्री की निगरानी के लिए दो पिटबुल कुत्ते लगाए गए थे, ताकि कोई भाग न सके। शिवम ने बताया कि दो मजदूरों ने भागने की कोशिश की थी, जिनकी कथित रूप से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। इस घटना के बाद सभी मजदूर दहशत में जीने लगे। फैक्ट्री में पहुंचते ही सभी के मोबाइल फोन छीन लिए गए थे, जिससे बाहरी दुनिया से संपर्क पूरी तरह टूट गया। इधर, शिवम की मां राजरानी ने बताया कि बेटे के लापता होने के बाद उन्होंने दिबियापुर पुलिस से लेकर गुरुग्राम पुलिस तक गुहार लगाई। वह अपने पति के साथ गुमशुदगी के पोस्टर लेकर जगह-जगह बेटे की तलाश करती रहीं। उन्होंने कहा कि भगवान की कृपा और पुलिस की कार्रवाई से बेटा सकुशल लौट आया, लेकिन उसके साथ हुई यातनाओं ने पूरे परिवार को अंदर तक झकझोर दिया। शिवम के पिता ने बेटे की सुरक्षित वापसी पर पुलिस का आभार व्यक्त किया। वहीं परिवार ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कठोर कदम उठाए जाने चाहिए।

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